Anushthan

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परिवार की सुख शांति के लिए पंडित जी द्वारा अनुष्ठान किये जाते है |

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कालसर्प दोष
Kalsarp Dosh

!! जय श्री महाकाल !! क्या है "कालसर्प योग" सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु...

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मंगल दोष पूजा
Mangal Dosh Puja

मंगल ग्रह यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो तो कुंडली को...

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पितृ दोष
Pitra Dosh

पितृदोष और कालसर्पदोष का सबसे प्राचीन स्थान सिद्धवट घाट है यहीं पर पितरों को मुक्ति प्रदान होती है ..

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नवग्रह जाप
Navgrah Jaap

ॐ ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी भानु: शशि भूमिसुतो बुध च। गुरु च शुक्र: शनि राहु केतव: सर्वेग्रहा: शान्ति करा: भवन्तु।।”

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अर्क/कुंभ विवाह
Ark/Kumbh Vivah

यदि लड़के अथवा लड़की की कुंडली में सप्तम भाव अथवा बारहवां भाव क्रूर ग्रहों से पीडि़त हो अथवा शुक्र...

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महामृत्युंजय जाप
Mahamrityunjay Jaap

महामृत्युंजय मंत्र का जप क्यों किया जाता है? शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से...

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ग्रहण योग
Grahan Yog

परेशानी वाली बात:- चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। यदि बुध की युति राहु के साथ है...

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रुद्राभिषेक पूजा
Rudrabhishek Puja

हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं।.......

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चांडाल दोष
Chandal Dosh

बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर एक दूसरे को किन्ही भी भावो में बैठ कर देखते हो, तो गुरू चाण्डाल..

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ग्रह वास्तु दोष
Grah Vastu Dosh

ग्रह वास्तु दोष वह स्थिति मानी जाती है जब किसी घर या स्थान का वास्तु (निर्माण व्यवस्था) और ग्रहों की स्थिति सही संतुलन में नहीं होती।

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विष दोष
Vish Dosh

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाले योग और दोष व्यक्ति के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते

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ऋण मुक्ति पूजा
Rin Mukti Puja

ऋण मुक्ति पूजा एक हिंदू धार्मिक प्रथा है जिसमें ऋण बंधन से मुक्ति प्राप्त करने के लिए पूजा की जाती है।

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ज्योतिष
Astrologer

ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम् अर्थात सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता..

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शिव शक्ति अनुष्ठान (यज्ञ)
Shiv Shakti Anushthan

शिव शक्ति अनुष्ठान एक विशेष धार्मिक पूजा-विधि है जिसमें भगवान शिव और माता शक्ति (पार्वती) की संयुक्त रूप से आराधना की जाती है।

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नवचंडी/सतचंडी अनुष्ठान
Navchandi/Satchandi

दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है, उसे शतचंडी यज्ञ बोला जाता है।॥

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मूर्तिप्राण प्रतिष्ठा
Murtipran Pratishtha

सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का बहुत ज्यादा महत्व है. मूर्ति स्थापना के समय प्राण प्रतिष्ठा जरूर किया जाता है

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बगलामुखी अनुष्ठान
Baglamukhi Anushthan

मां राज राजेश्वरी बगलामुखी पूजन के द्वारा सभी शत्रु पर विजय एवं काम क्रोध आदि पर नियंत्रण भगवती आराधना अनुष्ठान...

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संतान गोपाल अनुष्ठान
Santan Gopal Anushthan

भगवान बाल कृष्णा स्वरूप संतान प्राप्ति के लिए विशेष संतान गोपाल अनुष्ठान कर्म संपादित किया जाता है...