तीर्थराज अवंतिका उज्जैन में विश्वसनीय पंडित जी हर पूजा का सही समाधान
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Astrologer Pandit Rahul Sharma Ji
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल शर्मा जी प्रतिष्ठित एवं अनुभवी पंडित जी हैं, जिन्हें वैदिक पूजा-पाठ, अनुष्ठान एवं ज्योतिषीय उपायों में 15 वर्षों का अनुभव है। ये पूर्ण विधि-विधान और श्रद्धा के साथ विभिन्न धार्मिक पूजन एवं अनुष्ठान संपन्न करवाते हैं, जिनमें कालसर्प दोष निवारण पूजा, महामृत्युंजय जाप, दुर्गा सप्तशती पाठ, ग्रह दोष निवारण, मंगल दोष, पितृ दोष, श्रापित दोष, चांडाल दोष निवारण, कुम्भ विवाह, अर्क विवाह, ग्रहण दोष शांति, केंद्र दोष निवारण, कुंडली विश्लेषण, पत्रिका मिलान, वास्तु दोष निवारण, गृह प्रवेश पूजा, विवाह संस्कार एवं व्यापार बाधा निवारण पूजन शामिल हैं।
पंडित राहुल शर्मा जी का उद्देश्य लोगों के जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करना है। समस्याओं को शांति में बदलने का संकल्प लेकर हम आपकी सेवा में सदैव तत्पर हैं।
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Anushthan
परिवार की सुख शांति के लिए पंडित जी द्वारा अनुष्ठान किये जाते है |
मंगल दोष पूजा
मंगल ग्रह यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो तो कुंडली को मांगलिक माना जाता है, ऐसा होने पर ऐसे जातक का विवाह भी मांगलिक स्त्री या पुरुष से ही करना चाहिए| इसी प्रकार शनि देव यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो या दृष्टिगत भी हो तो कुंडली में मांगलिक योग का परिहार हो जाता है, सभी मांगलिक कुंडलियो में मांगलिक दोष हो ऐसा जरुरी नहीं होता है, लोग व्यर्थ में मांगलिक योग सुन के भयभीत हो जाते है, जबकि मंगल ग्रह तो शुभ कार्य, भूमि, ऋणहरता एवं फल प्रदान करने वाले देवता है, कुंडली में मंगल जब ख़राब होता है तब इन्सान , कुछ दोगल होजाता है , और यही कारन है की वहा अपने जीवन में अक्सर सफल होता है, एसा इन्सान मोम की तरह पिघल ता रहता है....
कालसर्प दोष
"कालसर्प योग क्या है ?"
काल सर्प दोष क्या है? कुंडली में कालसर्प दोष कैसे बनता है और इस योग को कालसर्प योग क्यों कहा जाता है? कालसर्प योग, मूलतः संस्कृति के दो शब्दों से मिलकर बना है जिनका अर्थ भिन्न भिन्न कर्मकांडी विद्वानों ने निकाला है, ये दो शब्द है ‘काल’ एवं ‘सर्प’, काल के भी दो अर्थ है, प्रथम मृत्यु और दूसरा है समय, इसी प्रकार से सर्प शब्द के भी दो अर्थ है, प्रथम है सर्प अर्थात नाग और दूसरा है रेंगना, अब हम अगर दोनों शब्दों को संयुक्त करते है तो चार अर्थ निकलते है प्रथम सर्प द्वारा मृत्यु, दूसरा समय पर नाग का प्रकोप, तीसरा बहुत ही दुर्दशा के साथ जीवन जीना, यही समय का रेंगना, और चौथा है मृत्यु का धीरे धीरे व्यक्ति को अपने निकट बुलाना किन्तु बहुत कष्टों के साथ, इस प्रकार किसी भी अर्थ में यह उस व्यक्ति के लिए शुभ नहीं है जिसकी कुंडली में कालसर्प योग बना हुआ है।
ग्रहण दोष पूजन
ग्रहण दोष तब बनता है जब कुंडली में राहु या केतु सूर्य अथवा चंद्रमा के साथ एक ही राशि में स्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में मानसिक तनाव, आत्मविश्वास की कमी, करियर में रुकावटें, पारिवारिक समस्याएं और अचानक उतार-चढ़ाव जैसी परेशानियाँ देखने को मिलती हैं; इसे सूर्य ग्रहण दोष या चंद्र ग्रहण दोष कहा जाता है और इसके निवारण के लिए राहु-केतु के मंत्र जाप, ग्रह शांति पूजा, हवन, काले वस्त्र या तिल का दान तथा उचित उपाय किए जाते हैं।...
महामृत्युंजय जाप
महामृत्युंजय जाप भगवान शिव के एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र का जप होता है, जिसे “मृत्यु पर विजय पाने वाला मंत्र” कहा जाता है। इसमें “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…” मंत्र का बार-बार उच्चारण किया जाता है, जो व्यक्ति को भय, रोग, दुर्घटना और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा देने वाला माना जाता है। यह जाप लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए किया जाता है और इसे रुद्राक्ष माला से श्रद्धा और नियम के साथ किया जाता है।
अर्क/कुंभ विवाह
पुरूषों के विवाह में आने वाली विलम्ब या दोषों को दूर करने के लिए कन्या का विवाह करने से पूर्व पुरुष का विवाह सूर्य पुत्री से करवाना चाहिए, जो धनुषाकार वृक्ष के रूप में होती है, विवाह के बाद यह विवाह विधि अर्क कहलाती है। विवाह। जिन पुरुषों की कुण्डली में सप्तम भाव, अष्टम शुक्र, सूर्य, सप्तम, द्वादेश, शनि हो, उन पर शनि की युति होती है। यदि वर की कुण्डली में आठ मंगलदोष हों, भावों में मंगल 1,2,4,7,8,12 में हो तो वह दाम्पत्य विलम्ब या वैवाहिक सुखों में संस्कार योग है। ऐसे पुरुषों को अपने माता-पिता के साथ आना चाहिए और एक अर्क के पेड़ से उनका विवाह करना चाहिए। इसके बाद उन्हें किसी लड़की से शादी करनी चाहिए। ताकि बच्ची को कोई नुकसान न हो।
Vishesh Pujan
🕉️84 महादेव पूजन🕉️
84 महादेव पूजन भगवान महादेव के 84 दिव्य स्वरूपों की विशेष आराधना का महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह पूजा उन लोगों द्वारा करवाई जाती है जो अपने जीवन में आने वाली समस्याओं, बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पाना चाहते हैं। मान्यता के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के जीवन में बार-बार असफलता, आर्थिक संकट, पारिवारिक कलह, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ, मानसिक तनाव या ग्रह दोष जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तब 84 महादेव पूजन बहुत लाभकारी माना जाता है। इस पूजा के माध्यम से भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति, विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने, संतान सुख प्राप्त करने, व्यापार में वृद्धि, नौकरी में सफलता और शत्रु बाधाओं से रक्षा के लिए भी कराया जाता है। कई लोग पितृ दोष, कालसर्प दोष या अन्य धार्मिक बाधाओं की शांति के लिए भी यह पूजा करवाते हैं। ऐसा माना जाता है कि 84 महादेवों की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह व्यक्ति को भगवान शिव के प्रति भक्ति, आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन प्रदान करती है। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया 84 महादेव पूजन भक्त की इच्छाओं की पूर्ति करने वाला और जीवन को सफल बनाने वाला शुभ अनुष्ठान माना जाता है।
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पूजा-अनुष्ठान के पवित्र क्षणों की सुंदर तस्वीरें
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